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डॉ राजेंद्र प्रसाद का जीवन परिचय

डॉ राजेंद्र प्रसाद का जीवन परिचय

भारत के प्रथम राष्ट्रपति: भारत रत्न डॉ. राजेन्द्र प्रसाद का जीवन परिचय आज सभी कॉम्पीटिशन एग्जाम में समान्य ज्ञान के सेक्शन में  सभी महान व्यक्ति से सबंधित बहुत से प्रश्न पूछे जाते है क्योकि सभी महान व्यक्ति से सबंधित प्रश्न समान्य ज्ञान का एक इम्पोर्टेन्ट पार्ट है इसलिए यदि कोई उमीदवार किसी कॉम्पीटिशन एग्जाम की तैयारी कर रहा है तो उसे सभी महान व्यक्ति से सबंधित समान्य ज्ञान होना चाहिए इसलिए आज हम सभी महान व्यक्ति  के बारे में बतायेंगे यदि आप विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे: आईएएस, शिक्षक, यूपीएससी, पीसीएस, एसएससी, बैंक, एमबीए एवं अन्य सरकारी नौकरियों के लिए तैयारी कर रहे हैं, तो आपको सभी महान व्यक्ति से सबंधित जानकारी होनी चाहिए इनमे से प्रश्न अक्सर एग्जाम में पूछे जाते है|

डॉ राजेंद्र प्रसाद

राजेन्द्र प्रसाद (3 दिसम्बर 1884 – 28 फरवरी 1963) भारत के प्रथम राष्ट्रपति थे। वे भारतीय स्वाधीनता आंदोलन के प्रमुख नेताओं में से थे जिन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष के रूप में प्रमुख भूमिका निभाई। उन्होंने भारतीय संविधान के निर्माण में भी अपना योगदान दिया था जिसकी परिणति 26 जनवरी 1950 को भारत के एक गणतंत्र के रूप में हुई थी। राष्ट्रपति होने के अतिरिक्त उन्होंने स्वाधीन भारत में केन्द्रीय मन्त्री के रूप में भी कुछ समय के लिए काम किया था। पूरे देश में अत्यन्त लोकप्रिय होने के कारण उन्हें राजेन्द्र बाबू या देशरत्न कहकर पुकारा जाता था।

डॉ. राजेन्द्र प्रसाद का जीवन परिचय

डॉ. राजेन्‍द्र प्रसाद बेहद प्रतिभाशाली और विद्वान व्यक्ति थे। वे भारतीय स्वाधीनता आंदोलन के प्रमुख नेताओं में से थे जिन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष के रूप में प्रमुख भूमिका निभाई। डॉ. राजेन्‍द्र प्रसाद का जन्‍म 03 दिसम्बर 1884 को बिहार प्रान्त के एक छोटे से गाँव जीरादेयू हुआ था। इनके पिता का नाम महादेव सहाय तथा माता का नाम कमलेश्वरी देवी था। प्रसाद जी की प्रारंभिक शिक्षा उन्हीं के गांव जीरादेई में हुई। उन्होंने 18 वर्ष की उम्र में उन्होंने कोलकाता विश्वविद्यालय की प्रवेश परीक्षा दी। उस प्रवेश परीक्षा में उन्हें प्रथम स्थान प्राप्त हुआ था राजेंद्र बाबू का विवाह उस समय की परिपाटी के अनुसार बाल्य काल में ही, लगभग 13 वर्ष की उम्र में, राजवंशी देवी से हो गया। विवाह के बाद भी उन्होंने पटना की टी० के० घोष अकादमी से अपनी पढाई जारी रखी। उनका वैवाहिक जीवन बहुत सुखी रहा और उससे उनके अध्ययन अथवा अन्य कार्यों में कोई रुकावट नहीं पड़ी।

उनकी प्रतिभा ने गोपाल कृष्ण गोखले तथा बिहार-विभूति अनुग्रह नारायण सिन्हा जैसे विद्वानों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। 1915 में उन्होंने स्वर्ण पद के साथ विधि परास्नातक (एलएलएम) की परीक्षा पास की और बाद में लॉ के क्षेत्र में ही उन्होंने डॉक्ट्रेट की उपाधि भी हासिल की। राजेन्द्र बाबू कानून की अपनी पढाई का अभ्यास भागलपुर, बिहार में कया करते थे

संक्षिप्त विवरण (Quick Info):

नाम डॉ. राजेन्‍द्र प्रसाद
जन्म तिथि 03 दिसम्बर 1884
जन्म स्थान जीरादेयू, बिहार
निधन तिथि 28 फरवरी 1963
उपलब्धि भारत के प्रथम राष्‍ट्रपति
उपलब्धि वर्ष 1950

 

डॉ. राजेन्द्र प्रसाद से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य: (Important Facts Related to Dr. Rajendra Prasad)

  1. अपने राजनैतिक और सामाजिक योगदान के लिए सन 1962 में उन्हें भारत के सर्वश्रेष्ठ नागरिक सम्मान “भारत रत्न” से सम्‍मानित किया गया था।
  2. देश के सर्वोच्‍च सम्‍मान भारत रत्न अवार्ड की शुरुआत डॉ० राजेंद्र प्रसाद के द्वारा 02 जनवरी 1954 को हुई थी।
  3. 1915 में उन्होंने स्वर्ण पद के साथ विधि परास्नातक (एलएलएम) की परीक्षा पास की और बाद में लॉ के क्षेत्र में ही उन्होंने डॉक्ट्रेट की उपाधि भी हासिल की।
  4. 1934 में वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के मुंबई अधिवेशन में अध्यक्ष चुने गये।
  5. भारत के राष्ट्रपति बनने से पहले तीन बार अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष और संविधान सभा के अध्यक्ष रह चुके थे।
  6. पूरे देश में अत्यन्त लोकप्रिय होने के कारण उन्हें राजेन्द्र बाबू या देशरत्न कहकर पुकारा जाता था।
  7. देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेन्‍द्र प्रसाद का निधन 28 फरवरी, 1963 को पटना के निकट सदाकत आश्रम में हो हुआ था।
  8. राजेन्‍द्र प्रसाद जी 26 जनवरी 1950 को भारत के प्रथम राष्ट्रपति बने और वे इस पद पर 1962 तक रहे थे।
  9. डॉ राजेन्‍द्र प्रसाद जी को भारत झोडो आन्‍दोलन में भाग लेने के कारण्‍ा 1942 में जेल जाना पड़ा।
  10. राजेन्द्र प्रसाद, भारत के एकमात्र राष्ट्रपति थे जिन्होंने दो कार्यकालों तक राष्ट्रपति पद पर कार्य किया।

डॉ. राजेन्द्र प्रसाद की प्रसिद्ध पुस्तकें और रचनायें:

देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेन्‍द्र प्रसाद ने कई प्रसिद्ध पुस्तके भी लिखी थी, जिनमें ये मुख्य है:-

  • उनकी आत्मकथा (1946),
  • चम्पारन में सत्याग्रह (1922),
  • इंडिया डिवाइडेड (1946),
  • महात्मा गांधी एंड बिहार,
  • सम रेमिनिसन्सेज (1949),
  • बापू के क़दमों में (1954) भी सम्मिलित हैं।

हमने इस पोस्ट में राजेंद्र प्रसाद की आत्मकथा डॉ राजेंद्र प्रसाद पर निबंध डॉ राजेंद्र प्रसाद के बेटों का नाम क्या था dr rajendra prasad childhood in hindi dr rajendra prasad information in gujarati language dr rajendra prasad information in marathi dr rajendra prasad essay in gujarati dr rajendra prasad ki jivani hindi  डॉ राजेंद्र प्रसाद का जीवन परिचय हिंदी मैं डॉ राजेंद्र प्रसाद के विचार डॉ राजेंद्र प्रसाद फोटो डॉ राजेंद्र प्रसाद किस जाति के थे राजेन्द्र प्रसाद शिक्षा राजेन्द्र प्रसाद पुस्तकें से संबंधित जानकारी दी है और आगे आने वाली परीक्षाओं में भी इनमें से काफी प्रश्न पूछे जा सकते हैं. तो इन्हें ध्यानपूर्वक पढ़ें. अगर इनके बारे में आपका कोई भी सवाल या सुझाव हो तो नीचे कमेंट करके पूछो और अगर आपको यह  जानकारी  फायदेमंद लगे तो अपने दोस्तों के साथ शेयर जरूर करें.

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