चांडाल किन्हें कहा जाता था? उनके क्या कर्तव्य थे?

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Questins Staff asked 2 months ago

चांडाल किन्हें कहा जाता था? उनके क्या कर्तव्य थे?चीनी यात्री फा-शिएन तथा श्वैन-त्सांग उनके बारे में क्या लिखते हैं? चांडाल किसे कहते हैं चांडाल का मतलब क्या होता है

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Madan Verma Staff answered 4 months ago

ब्राह्मण कुछ लोगों को वर्ण-व्यवस्था वाली सामाजिक प्रणाली का अंग नहीं मानते थे। साथ ही उन्होंने समाज के कुछ वर्गों को “अस्पृश्य’ घोषित कर सामाजिक विषमता को और अधिक जटिल बना दिया। ब्राह्मणों का यह मानना था कि कुछ कर्म विशेष रूप से अनुष्ठानों के संपादन से जुड़े कर्म ‘पवित्र’ होते हैं। अतः अपने-आप को पवित्र मानने वाले लोग अस्पृश्यों से भोजन स्वीकार नहीं कर सकते। पवित्रता के इस पहलू के ठीक विपरीत कुछ ऐसे कार्य थे जिन्हें दूषित’ माना जाता था, जैसे—शवों की अंत्येष्टि करना तथा मृत पशुओं को छूना। ऐसे दूषित कार्य करने वालों को चांडाल कहा जाता था। उन्हें वर्ण-व्यवस्था वाले समाज में सबसे घृणित स्थान पर रखा जाता था। स्वयं को सामाजिक क्रम में उच्च समझने वाले लोग इन लोगों का स्पर्श करना तो दूर, उन्हें देखना भी बुरा मानते थे। चांडालों के कर्तव्य-चांडालों के कर्तव्यों की सूची मनुस्मृति में मिलती है। (i) उन्हें गाँव से बाहर रहना होता था। (ii) वे फेंके हुए बर्तनों का प्रयोग करते थे, मृत लोगों के वस्त्र तथा लोहे के आभूषण पहनते थे। (iii) रात्रि में वे गाँव और नगरों में चल-फिर नहीं सकते थे। (iv) उन्हें उन मृतकों की अंत्येष्टि करनी पड़ती थी जिनका कोई सगा-संबंधी नहीं होता था। (1) उन्हें जल्लाद के रूप में भी कार्य करना पड़ता था।
चीनी यात्रियों के वृत्तांत-चीन से आए बौद्ध भिक्षु फा-शिएन (Faxian) का कहना है कि अस्पृश्यों को सड़क पर चलते हुए करताल बजाकर अपने आने की सूचना देनी पड़ती थी ताकि अन्य लोग उन्हें देखने के दोष से बच जाएँ। एक अन्य चीनी तीर्थयात्री श्वैन-त्सांग (Xvan-Zang) कहता है कि जल्लादों और सफ़ाई करने वालों को नगर से बाहर रहना पड़ता था।

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