उपसर्ग और प्रत्यय किसे कहते हैं और इसके उदाहरण

उपसर्ग और प्रत्यय किसे कहते हैं और इसके उदाहरण

उपसर्ग की परिभाषा -उपसर्ग शब्दांश अथवा अव्यय को कहते हैं जो किसी शब्दांश अथवा अव्यय धातु के साथ मिलकर विशेष अर्थ प्रकट करता है।उपसर्ग निम्नलिखित कार्य करते हैं.

1.उपसर्ग के प्रयोग से शब्द के अर्थ में नवीनता आ जाती है।
2. उपसर्ग के प्रयोग से शब्द के अर्थ में कोई अंतर नहीं आता।
3.उपसर्ग के प्रयोग से शब्द के अर्थ में विपरीतता आ जाती है।

उपसर्ग और उनके अर्थ और शब्द

अति – अधिक, ऊपर, उस पार = अतिरिक्त, अतिशय, अतिकाल, अत्याचार (अति + आचार)
अनु – क्रम, पश्चात् समानता  = अनुक्रम, अनुशीलन, अनुचार, अनुगामी, अनुसार
अधि-  श्रेष्ठ, ऊपर, समीपता = अधिकार, अधिपति, अधिराज, अध्यक्ष (अधि + अक्ष)
अप – लघुता, अभाव, हीनता = अपमान, अपशब्द, अपहरण, अपयश
अभि – समीपता, अधिकता = अभिमान, अभिभावक, अभिशाप, अभिप्राय
आ-  सीमा, समेत, कमी = आरक्त, आकाश, आरंभ, आकर्षण
उत् – उच्चता, उत्कर्ष, श्रेष्ठता =  उत्साह, उत्कर्ष, उत्तम, उत्पन्न, उत्पल, उत्पत्ति
उद् – ऊपर, उत्कर्ष, श्रेष्ठ  = उद्गार, उद्गम, उद्धत, उद्यम, उद्घाटन, उद्भव
अव – हीनता, अनादर, अवस्था, अवगत, अवनत, अवलोकन, अवतार,
उप – सहाय, सुदृढ़, गौण, हीनता उपदेश, उपकार, उपमंत्री, उपनिवेश, उपनाम, उपवन, उपस्थित, उपभेद
दुर् – बुरा, दुः, दुस्, दुश्, दुष = दुर्दशा, दुर्लभ, दुर्जन, दुराचार (दुर् + आचार), दुर्गम, दुस्साहस
नि – भीतर, नीचे, बाहर = निकृष्ट, निपात, नियुक्त, निवास, निमग्न, निवारण, निषेध, निरोध, निम्न,
निर् – नहीं, बिना = निर्वास, निराकरण, निर्भय, निरपराध, निर्मल, निर्वाह, निर्दोष, निर्जीव
निस – बिना = निश्चल, नि:शंक, निस्संदेह।
परा – उलटा, अनादर, नाश पराभव, पराजय, पराक्रम, परामर्श, परास्त।
परि – आस-पास, चारों ओर = परिजन, परिक्रमा, परिणाम, परिपूर्ण, परिवर्तन, परिदर्शन, परिभ्रमण
प्र – धिक, आगे, ऊपर, यश = प्रकाश, प्रचार, प्रबल, प्रभु, प्रयोग, प्रसार, प्रस्थान, प्रचारक, प्रसन्न,

उपसर्ग के समान कुछ अन्य अव्यय

ये शब्दांश विशेषण अथवा अव्यय हैं जो उपसर्ग के रूप में प्रयुक्त होते हैं।

अधस् – नीचे = अध: पतन, अधोभाग, अधोमुख, इत्यादि।
– अभाव, निषेध = अगम, अज्ञान, अधर्म, अलौकिक, अनीति
अंतर – भीतर = अंत:करण, अंतस्थ, अंतर्भाव, अंतर्दशा इत्यादि।
अमा – पास = अमात्य, अमावस्या।
अलम् – सुंदर = अलंकार।
आखिर – प्रकट, बाहर = आविर्भाव, आविष्कार।
इति – ऐसा = इतिपूर्व, इतिहास, इत्यादि, इतिवृत्त ।
कु – बुरा = कुकर्म, कुरूप।
चिर – बहुत = चिरकाल, चिरायु, चिरंजीव।
तिरस् – तुच्छ = तिरस्कार, तिरोभाव।
– अभाव = नास्तिक, नक्षत्र, नपुंसक।
नाना – बहुत = नाना रूप।
पुरा–  पहले = पुरातत्व, पुरातन।
पर – दूसरा = परदेसी, पराधान, परोपकार
पुनर् – दुबारा = पुनर्जन्म, पुनरुक्त, पुनर्विवाह
पूर्व – पहले = पूर्वार्ध, पूर्वपक्ष, पूर्वनिश्चित
प्रादुर् – प्रकट = प्रादुर्भाव।
प्रातः/प्रातर्  – सवेरे = प्रात:काल, प्रातः स्मरण।
पुरस् – सामने, आगे, पहले = पुरस्कार, पुरोहित।
बहिर् – बाहर  = बहिष्कार, बहिमल, बहिर्वार।
प्राक् – पहले, आगे = प्राक्कथन, प्राक्कर्म
स्व – स्वयं, निज  = स्वभाव, स्वराज्य, स्वयंवर, स्वयंसेवक, स्वयंभू
सत् – अच्छा = सज्जन, (सत् + जन), सत्कार, सदाचार (सत् + आचार), सत्पात्र
सह – साथ = सहोदर, सहचर, सहानुभूति।
सह  -सहित = सगोत्र, सजीव, सरस, सफल, सजातीय।
अमा – प्रकट, बाहर = अमावस्या, अमात्य

हिंदी के उपसर्ग

अ – निषेध = अचेत, अमोल, अपढ़, अजान, अथाह, अगाध।
अन – नहीं = अनमोल, अनपढ़, अनजान, अनदेखा, अनबन
अध –  आधा = अधजला, अधखिला, अधपका, अधमरा।
उन – एक क्रम = उनसठ, उनचास, उनहत्तर।
औ  – हीनता, निषेध  = औघट, औगुन, औसर।
दु – बुरा, हीन  = दुकाल, दुबला।
नि – निषेध, अभाव =निडर, निकम्मा, निखरा, निधड़क, निगोड़ा।
बिन – निषेध = बिनदेखा, बिनबोया, बिनखाया, बिनचखा।
भर – पूरा, ठीक = भरपेट, भरपूर, भरसक, भरमार।
कु, क –. बुरा हीनता = कुपात्र, कुघड़ी, कुमार्ग, कपूर, कपूत।
सु.स  – अच्छा, सहित = सुडौल, सुजान, सुघड़, सुखद, सुपात्र, सपूत, सजग, सगोत्र, सरस, सहित
न – अभाव = नपूता, नपूती

उर्दू के उपसर्ग

अल – निश्चित = अलबत्ता
कम – थोड़ा = कमउम्र, कमज़ोर, कमबख्त।
खुश – अच्छे के अर्थ में = खुशबू, खुशहाल, खुशदिल, खुशख्याली।
गैर – निषेध = गैरकानूनी, गैरसरकारी।
दर – में = दरकार, दरअसल।
ना – अभाव = नामुमकिन, नापसंद, नाराज़, नालायक, नाचीज़।
ब – अनुसार = बनाम, बदौलत।
बर – ऊपर = बरदाश्त, बराबर।
बा – साथ = बाकायदा, बाइज्ज़त।
बिल – साथ = बिलकुल।
बिला – बगैर, बिना = बिलाकसूर, बिलालिहाज।
बिना – रहित = बिना कसूर, बिना काम।
बे – बिना = बेकाम, बेईमान, बेवकूफ, बेरहम, बेनाम, बेकसूर।
ला – बिना = लाचार, लाजवाब, लापरवाह, लापता।
एन – ठीक = एनवक्त।
सर – मुख्य = सरकार, सरपंच, सरदार, सरताज।
हम – बराबर = हमउम्र, हमदर्दी, हमवतन।
हर – प्रति,प्रत्येक = हररोज, हरमाह, हरचीज़, हरसाल, हरतरह
फी – में पर = फिलहाल, फीआदमी।

अंग्रेजी उपसर्ग

सब – अधीन, भीतर, = सब-जज, सब-कमेटी, सब-इंस्पेक्टर।
उप
हैड – प्रमुख = हैडआफिसर, हैडक्लर्क, हैडमास्टर।
डिप्टी – उप = डिप्टी कमिश्नर, डिप्टी कलक्टर।
वाइस – उप चांसलर। = वाइस प्रिंसीपल, वाइस प्रेसिडेंट, वाइस
हाफ – आधा = हाफ पैंट, हाफ शर्ट।

प्रत्यय

प्रत्यय की परिभाषा-जो शब्दांश किसी शब्द के अंत में जुड़कर उसके अर्थ में परिवर्तन ला दें, उन्हें प्रत्यय कहते हैं। ये भी उपसर्गों की तरह अधिकारी या अव्यय शब्द या शब्दांश हैं, पर ये शब्दों के पीछे लगते हैं। प्रमुख प्रत्यय इस प्रकार हैं

कर्तृवाचक तद्धित

जो शब्द क्रिया के अतिरिक्त अन्य शब्दों में प्रत्यय लगने से बनते हैं और संज्ञा बनकर वाक्यों में कत्र्ता के रूप में प्रयुक्त होते हैं, उन्हें कर्तृवाचक तधित कहते हैं। ये शब्द प्रायः जातिवाचक और व्यक्तिवाचक संज्ञाओं से बनते हैं।

संज्ञा और इसके प्रत्यय और शब्द रूप

योगी + ई  = योग
गंध + ई = गंधी
घर + वाला = घरवाला
पूजा + आरी = पुजारी
साँप + एरा = सपेरा
गाड़ी + वान = गाड़ीवान्
सोना + आर = सुनार
चूड़ी + हारा = चूड़ीहारा
कुल + ईन = कुलीन
लाठी + ऐत = लठैत
डाका + ऐत = डकैत
आढ़त + इया = आढ़तिया
खेल + आड़ी = खिलाड़ी
प्रभा + आकर = प्रभाकर
दिन + कर = दिनकर
स्वर्ण + कार = स्वर्णकार
गंगा + धर = गंगाधर
जल + धर = जलधर
दया + वान् = दयावान्
गंगा + एय = गांगेय
राधा + एय = राधेय
पश्चिमी + त्य = पाश्चात्य

भाववाचक तद्धित

संज्ञा, और विशेषण या क्रिया-शब्दों में प्रत्यय लगाने से जो शब्द बनते हैं, वे भाववाचक तधित होते हैं। भाववाचक संज्ञाएँ निम्नलिखित तीन रीतियों से बनाई जाती हैं

जातिवाचक संज्ञा से

मित्र + ता = मित्रता
दास + ता = दासता
देव + त्व = देवत्व
नर + त्व = नरत्व
लड़का + पन = लड़कपन
बालक + पन = बालकपन
पंडित + आई = पंडिताई
ठाकुर + आई = ठाकुराई
दुश्मन + ई = दुश्मनी
जोड़ + ई = जोड़ी
बाप + औती = बपौती
बूढ़ा + आपा = बुढ़ापा

2.विशेषण शब्दों से

लघु  +त्व  = लघुत्व
गुरु+ त्व = गुरुत्व
प्रभु + त्व = प्रभुत्व
स्वाधीन +ता = स्वाधीनता
शिष्ट + ता = शिष्टता
ऊँचा + आई = ऊँचाई
भला + आई = भलाई
पागल + पन = पागलपन
भोला + पन = भोलापन
चिकना + आहट = चिकनाहट
कडुआ + हट = कड़ाहट
खट्टी + आस = खटास
मीठा + आस = मिठास

क्रिया शब्दों से

चिल्लाना + आहट = चिल्लाहट
झुंझलाना + आहट = झुंझलाहट
पहनना + आवा = पहनावा
बुलाना + आवा = बुलावा
कमाना + आई = कमाई
खोदना + आई = खुदाई

उर्दू के भाववाचक प्रत्यय

बहुत + आयत = बहुतायत
आदमी + इयत = आदमीयत
बचना + आव = बचाव
उड़ना + आन = उड़ान

3. विशेषण प्रत्यय

संज्ञा या क्रिया शब्दों में जिन प्रत्यय को लगाने से विशेषण शब्द बनाए जाते हैं, उन्हें विशेषण प्रत्यय कहते हैं

धर्म + इक = धार्मिक
वर्ष + इक = वार्षिक
शरीर + इक = शारीरिक
समाज + इक = सामाजिक
स्थान + ईय = स्थानीय
पर्वत + ईय = पर्वतीय
राष्ट्र + ईय = राष्ट्रीय
प्रकाश + इत् = प्रकाशित
हर्ष + इत् = हर्षित
अपमान + इत् = अपमानित
लज्जा + इत् = लज्जित
श्रद्धा + आलु = श्रद्धालु
दया + आलु = दयालु
कृपा + आलु = कृपालु
रेशम + ई = रेशमी
बनारस + ई = बनारसी
पहाड़ + ई = पहाड़ी
अँग्रेज़ + ई = अंग्रेजी
नमक + ईन = नमकीन
कुल + ईन = कुलीन
हठ + ईला = हठीला
रेत + ईला = रेतीला
धन + वान् = धनवान्
बुधि + मान् = बुधिमान्
पंक + इल = पंकिल
हिंसा + क = हिंसक
शान + दार = शानदार
झगड़ा + लू = झगड़ालू
नाम + वर = नामवर
पेट + ऊ = पेटू

क्रिया से विशेषण

टिकना + आऊ = टिकाऊ
चमकना + ईला = चमकीला
हँसना + ओड़ = हँसोड़
भूलना + अक्क = भुलक्कड़
होन + हार = होनहार

लघुतावाचक तद्धित-जातिवाचक

संज्ञाओं में इया, ई, डा, री आदि प्रत्ययों के प्रयोग से लघुतावाचक तन्धित शब्द बनते हैं।

खाट + इया = खटिया
मुख + ड़ा = मुखड़ा
छाता + री = छतरी

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